बैंक घोटाले की जांच का दायरा बढ़कर आय स्त्रोत से अधिक संपत्ति तक जाने की संभावना
सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को सीबीआई दे रही रिपोर्ट, जांच का दायरा बढ़ा तो अधिकारियों की बढ़ेगी मुश्किलें

सत्य खबर हरियाणा
IDFC First Bank Scam : हरियाणा के 657 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक फ्रॉड मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों (दो आईएएस और एक आईएफएस) की गिरफ्तारी के बाद नौकरशाही के भीतर बेचैनी बढ़ी हुई है। आशंका और डर इस बात को लेकर है कि कहीं जांच आय से अधिक संपत्ति (डिस्प्रोपोर्शनट एसेट्स) की पड़ताल तक न पहुंच जाए। सरकारी धन को निजी बैंकों में निवेश करने, विभिन्न खातों के संचालन और शेल कंपनियों के जरिए राशि के कथित हस्तांतरण से जुड़े मामलों की जांच के बीच प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई है।

सी.बी.आई. इस पूरे घोटाले में डिपार्टमेंट टू डिपार्टमेंट इन्वैस्टीगेशन मॉडल पर काम कर रही है। यानी एक-एक विभाग की फाइल, बैंक ट्रांजैक्शन, जिम्मेदार अधिकारियों और लाभार्थियों की अलग-अलग जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार सी.बी.आई. फिलहाल 3 विभागों की जांच पूरी कर चुकी है, जिसमें 2 आई.ए.एस. अधिकारी गिरफ्तार हो चुके हैं। जबकि 5 अन्य विभागों की जांच अभी बाकी है। इनमें से हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच अंतिम छोर पर है, जिसमें जल्द 2 आई.ए.एस. अफसरों की गिरफ्तारी हो सकती है। एजेंसी का मानना है कि हर विभाग में पैसों के ट्रांसफर और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका अलग-अलग रही है, इसलिए जांच भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल बैंक स्कैम की सीधी मॉनिटरिंग प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) स्तर पर हो रही है। केंद्रीय जांच टीम रोजाना केस की प्रगति का अपडेट दे रही है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ आई.ए. एस. अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई और पूछताछ से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों को भी केंद्रीय स्तर से मंजूरी मिल रही है। बताया गया कि मामले में आई. ए. एस. की गिरफ्तारी से पहले जांच टीम अपने वरिष्ठ अधिकारियों को फाइल भेज कर स्वीकृति लेती है। इस जांच का जिम्मा आई.जी. रैंक के अफसर के पास है।
कहा जा रहा है, यदि दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण में नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा व्यक्तिगत संपत्तियों, निवेश, बैंक खातों और अन्य वित्तीय स्रोतों तक भी बढ़ सकता है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। इसी बीच छह अन्य आईएएस अधिकारी अब भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। इनमें से एक अधिकारी अग्रिम जमानत के लिए अदालत पहुंच चुके हैं, जबकि एक अन्य अधिकारी ने विभाग को पत्र लिखकर बैंक खातों और सरकारी धन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
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